भारत के राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियाँ

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भारत के राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियाँ
भारत के राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियाँ

भारत के राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियाँ (Executive power of the President of India) अथवा संघ की कार्यपालिका शक्तियाँ (Executive power of the Union) : भारत का राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति का प्रधान होता है | भारत के संविधान के अनुच्छेद 53 (article-53) के अनुसार संघ (Union) की कार्यपालिका शक्ति भारत के राष्ट्रपति में निहित होंगी और राष्ट्रपति अपनी इस कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ अधिकारियों (officers subordinate) के माध्यम से करेगा | यहाँ कार्यपालिका शक्ति का अर्थ ‘सरकार की कामकाज करने की शक्ति’ से है और अधीनस्थ अधिकारियों का मतलब केन्द्रीय मंत्रीमण्डल (union cabinet) से है |

कार्यपालिका शक्ति का विस्तार

संविधान के अनुच्छेद 73 (article 73) के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति (executive power of the union) का विस्तार उन विषयों (matters) तक होगा जिनके सम्बन्ध में संसद को विधि (laws) बनाने की शक्ति है | साथ ही उन सभी अधिकारों के प्रयोग तक होगा जो किसी संधि या करार (treaty or agreement) के आधार पर भारत सरकार (Government of India) को प्राप्त होंगे |

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राष्ट्रपति नाममात्र प्रमुख

यद्यपि संघ की कार्यपालिका का प्रमुख राष्ट्रपति होता है और कार्यपालिका के समस्त कार्य राष्ट्रपति के नाम से ही किये जाते है | लेकिन राष्ट्रपति के लिए यह अपेक्षित है कि वह मंत्रीमण्डल की सहायता व परामर्श से ही कार्य करे | संविधान का अनुच्छेद 74 राष्ट्रपति से यह अपेक्षा करता है कि वह अपने समस्त कृत्यों का प्रयोग करते समय मंत्रिपरिषद की सलाह से ही कार्य करेगा | ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करने से मना करने पर राष्ट्रपति पर संविधान के उल्लंघन के लिए महाभियोग (Impeachment) लगाया जा सकता है |

संविधान के 44वें संशोधन, 1978 (44th Constitution Amendment, 1978) में राष्ट्रपति को यह अवसर प्रदान किया है कि वह सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए मंत्रिपरिषद को वापस कर सकता है परन्तु यदि मंत्रिपरिषद अपनी पहले वाली सलाह पर ही टिकी रहती है तब राष्ट्रपति उस सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य होता है | ध्यान रहे कि पुनर्विचार के लिए वापस भेजने की शक्ति का प्रयोग राष्ट्रपति एक विषय के बारे में केवल एक बार ही कर सकता है |

44वें संविधान संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रपति आपात की उद्घोषणा (Proclamation of Emergency) तभी कर सकता है जब उसे संघ के मंत्रिमंडल (Union Cabinet) द्वारा लिखित रूप में यह संदेश प्राप्त हो जाये कि उसे ऐसा करने की सलाह देने का निर्णय कर लिया है |  

इसप्रकार वास्तव में राष्ट्रपति केवल औपचारिक, संवैधानिक अथवा नाममात्र प्रधान होता है और वास्तविक अथवा राजनीतिक कार्यपालिका शक्ति मंत्रीमण्डल के पास होती है |

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राष्ट्रपति की विवेक-शक्ति विशेषाधिकार

यद्यपि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य है, फिर भी कुछ ऐसे अतिमहत्वपूर्ण मामलें है जहाँ राष्ट्रपति अपने विवेक और बुद्धि का प्रयोग कर सकता है | ये मामले निम्न है –

1- प्रधानमंत्री की नियुक्ति के सम्बन्ध में : जब कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाये कि किसी भी राजनैतिक पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत न मिला हो अथवा लोकसभा में प्रस्तुत किये गये अविश्वास प्रस्ताव के पारित हो जाने पर मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ा हो, तब राष्ट्रपति अपनी विवेक-शक्ति और बुद्धि का प्रयोग करके ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है, जिसके सम्बन्ध में उसे विश्वास हो कि लोकसभा में वह व्यक्ति अपना बहुमत सिद्ध करने में सफल होगा |

राष्ट्रपति ने अपनी इस शक्ति का प्रयोग करके वर्ष 1979 में चौधरी चरण सिंह, वर्ष 1989 में वी.पी. सिंह, वर्ष 1991 में पी.वी. नरसिंह राव, वर्ष 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी, वर्ष 1996 में ही एच.डी. देवगौड़ा, वर्ष 1997 में इंद्रकुमार गुजराल और वर्ष 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया था |

2- प्रधानमंत्री की मृत्यु होने के सम्बन्ध में : प्रधानमंत्री की अकस्मात मृत्यु हो जाने पर विद्यमान मंत्रिपरिषद तुरंत विघटित हो जाती है ऐसी परिस्थिति में राष्ट्रपति बिना मंत्रियों की सलाह के अपने विवेक से नये प्रधानमंत्री के चुनाव की शक्ति रखता है | लेकिन यह आवश्यक है कि जो भी नया प्रधानमंत्री चुना जायेगा उसे लोकसभा में बहुमत प्राप्त होना चाहिए | 

3- मंत्रियों की बर्खास्तगी के सम्बन्ध में : अगर मंत्रिपरिषद ने लोकसभा में विश्वास गवां दिया है परन्तु वह इस्तीफा देने के लिए राजी न हो तो ऐसी परिस्थिति में राष्ट्रपति अपने विवेक से उस स्थिति में मंत्रियों को बर्खास्त कर सकता है |       

4- लोकसभा के विघटन के सम्बन्ध में : राष्ट्रपति ऐसी मंत्रिपरिषद की सलाह पर लोकसभा का विघटन कर सकता है जिसके विरुद्ध लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया गया हो या फिर जिसने लोकसभा में बहुमत का समर्थन खो दिया हो |

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मंत्रिपरिषद के गठन की शक्ति

संविधान के अनुच्छेद 74 (article 74) के अनुसार राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति संचालन में सलाह और सहायता देने के लिए एक मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) का करता है, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री (Prime Minister) होता है | प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है (article 75) |

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों (मंत्रियों) की नियुक्ति करता है | मंत्रिपरिषद के किसी भी सदस्य (मंत्री) को बर्खास्त करने की राष्ट्रपति की शक्ति भी वास्तव में प्रधानमंत्री की शक्ति होती है |

नियुक्ति सम्बन्धी शक्ति

हमारे संविधान ने राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया है कि वह संघ से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां करें | यद्यपि वह ये नियुक्तियां मंत्रिपरिषद की सलाह से ही करता है | ध्यान रहे कि अनुच्छेद 124(2) के अनुसार राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीशों की नियुक्ति के सम्बन्ध में भारत के मुख्य न्यायमूर्ति (Chief Justice of India) से और उच्चतम न्यायालय के व उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श करेगा, जो वह आवश्यक समझे | राष्ट्रपति को अपने द्वारा नियुक्त प्राधिकारियों व अधिकारियों को पदमुक्त करने की भी शक्ति प्राप्त है | राष्ट्रपति को इन्हे नियुक्त करने की शक्ति प्राप्त है –

  1. भारत का प्रधानमंत्री (Prime Minister of India)
  2. संघ के अन्य मंत्री (Other Ministers of the Union)
  3. भारत का महान्यायवादी  (The Attorney General for India)
  4. भारत का नियंत्रक महालेखापरीक्षक  (Comptroller and Auditor General of India)
  5. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश (Judges of Supreme Court)
  6. राज्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (Judges of High Court
  7. राज्यों के राज्यपाल (Governors of States)
  8. संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपाल या प्रशासक (Administrator of the Union Territories)
  9. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयोग के अन्य सदस्य (Chief Election Commissioner and other members of election commission)
  10. संघ लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्य (Chairman and other members of Union Public Service Commission)
  11. संयुक्त राज्य लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्य (Chairman and other members of Joint State Public Service Commission)
  12. वित्त आयोग के सदस्यों (Members of Finance Commission)
  13. राजभाषा आयोग (Official Language Commission)
  14. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष व सदस्य (Chairman and other members of National Commission for Minorities)
  15. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग के अध्यक्ष व सदस्य (Chairman and other members of National Commission for Scheduled Castes and Scheduled tribes)
  16. राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष व सदस्य (Chairman and other members of National Commission for Women)
  17. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष व सदस्य (Chairman and other members of National Human Rights Commission)
  18. इनके आलावा राष्ट्रपति आवश्यकता पड़ने पर लोकसभा के अस्थायी अध्यक्ष और राज्यसभा के कार्यकारी सभापति की भी नियुक्ति करता है |

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आयोगों के गठन की शक्ति

राष्ट्रपति को भारत के विभिन्न आयोगों के गठन की भी शक्तियां प्राप्त है | ये आयोग इस प्रकार है –

  1. जल प्रदाय में हस्तक्षेप का अन्वेषण करने के लिए आयोग
  2.  संघ लोक सेवा आयोग
  3.  राज्यों के समूहों के लिए संयुक्त आयोग
  4. भाषायी अल्पसंख्यक आयोग 
  5.  वित्त आयोग
  6. राजभाषा आयोग 
  7. अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग
  8. पिछड़े वर्गों की दशाओं का अन्वेषण करने के लिए आयोग

निष्कर्ष

भारत का राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति का प्रमुख होता है और संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होंगी जिसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा | साथ ही इस शक्ति विस्तार उन विषयों तक होगा जिनके सम्बन्ध में संसद को विधि बनाने की शक्ति है |

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राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति संचालन में सलाह और सहायता देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का करता है, वह अपने समस्त कृत्यों का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह से ही कार्य करता है | लेकिन वह ऐसी सलाह को एक विषय में एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है |

राष्ट्रपति कुछ अतिमहत्वपूर्ण मामलों में अपने विवेक और बुद्धि का प्रयोग कर सकता है | वह मंत्रिपरिषद की सलाह से संघ से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पदों पर विभिन्न नियुक्तियां करता है | साथ ही वह अपने द्वारा नियुक्त प्राधिकारियों व अधिकारियों को पदमुक्त भी कर सकता है | राष्ट्रपति संघ के विभिन्न आयोगों का गठन भी करता है |

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